Tuesday, October 2, 2018

हे बापू! हमें क्षमा करना!

दो अक्टूबर, 1944 को महात्मा गांधी के 75वें जन्मदिवस पर अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने संदेश में लिखा था, ‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’ 
आज बापू की 150वीं जयंती है। आजादी के बाद महात्मा गांधी की खूब मूर्तियां लगीं, प्रतिमाएं लगीं, अनेक मार्ग, स्थान और भवनों के नामकरण उनकी स्मृति में हुए; पर उनके दर्शन को समझने की कोशिश न के बराबर हुई। उनके विचारों को आत्मसात नहीं किया। मठाधीशों ने सिर्फ नाम का इस्तेमाल किया क्योंकि उनका नाम आदमी को वोट में तब्दील रखने की ताकत रखता था।
कुछ नासमझ लोगों ने उनकी हत्या से पहले और बाद में विषवमन जारी रखा, उनके चरित्र हनन की भी कोशिशें हुईं। यह जमात उतनी दोषी नहीं क्योंकि एक वर्ग विशेष द्वारा कुप्रचार से भ्रमित हुए इन लोगों ने कभी गांधी जी को उनके विचारों के माध्यम से समझने की कोशिश ही नहीं की।
हे बापू हम सबको क्षमा करना!
यहां बापू के कुछ सूत्र वाक्य प्रस्तुत हैं। इन अनमोल विचारों को पढ़कर आप गांधी के दर्शन का सूक्ष्म भाग समझ सकते हैं। खासतौर से नई पीढ़ी गांधी फिलॉसफी को समझ सकती है। उन्हें आभास होगा कि सदी के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन क्यों मोहनदास करमचंद से इतने प्रभावित थे कि उनकी स्टडी टेबल पर जो दो तस्वीरें थीं, उनमें से एक गांधी की तस्वीर हुआ करती थी। आखिर क्या करिश्मा था दुर्बल काया वाली इस शख्सीयत में कि तमाम महाशक्तियां उनसे खौफ खाती थीं और आमजन उनसे बेपनाह प्रेम करते थे। आखिर इस व्यक्ति में ऐसा क्या खास था कि उनके कथन पर लोग अटूट विश्वास करते थे और उनकी एक आवाज़ पर हुजूम उनके साथ उस डगर को चल पड़ता था जिस तरफ उनके कदम बढ़ते थे। बापू के अनमोल विचार किसी भी व्यक्ति की दशा और दिशा बदलने की सामर्थ्य रखते हैं।
01- सात घनघोर पाप : काम के बिना धन; अंतरात्मा के बिना सुख; मानवता के बिना विज्ञान; चरित्र के बिना ज्ञान; सिद्धांत के बिना राजनीति; नैतिकता के बिना व्यापार; त्याग के बिना पूजा।
02- शिक्षा अंग्रेजियत के पीछे भागने, अपने घर परिवार से अलग- थलग करने वाली या फिर सिर्फ ज्ञान जानने और रटने पर मजबूर करने वाली नहीं हो; बल्कि व्यावहारिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को विकसित करने वाली होनी चाहिए।
03- आपकी मान्यताएं आपके विचार बन जाते हैं,आपके विचार आपके शब्द बन जाते हैं, आपके शब्द आपके कार्य बन जाते हैं, आपके कार्य आपकी आदत बन जाते हैं, आपकी आदतें आपके मूल्य बन जाते हैं, आपके मूल्य आपकी नियति बन जाती है।
04- महिलाओं को सलाह है कि वे सभी अवांछित और अनुचित दबावों के खिलाफ विद्रोह करें। इस तरह के विद्रोह से कोई क्षति होने की आशा नहीं है। इससे तर्कसंगत प्रतिरोध होगा और पवित्रता आयेगी।
05- गलत परंपरा के जोर पर ही मूर्ख और निकम्मे लोग भी स्त्री के ऊपर श्रेष्ठ बनकर मजे लूट रहे हैं, जबकि वे इस योग्य हैं ही नहीं और उन्हें यह बेहतरी हासिल नहीं होनी चाहिए। स्त्रियों की इस दशा के कारण ही हमारे बहुत-से आंदोलन अधर में लटके रह जाते हैं।
06- यदि मैं स्त्री के रूप में पैदा होता तो मैं पुरूषों द्वारा थोपे गए किसी भी अन्याय का जमकर विरोध करता तथा उनके खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद करता।
07- कुरीति के अधीन होना कायरता है, उसका विरोध करना पुरुषार्थ है।
08- कोई त्रुटि तर्क-वितर्क करने से सत्य नहीं बन सकती और ना ही कोई सत्य इसलिए त्रुटि नहीं बन सकता है क्योंकि कोई उसे देख नहीं रहा है।
09- अहिंसा की परिभाषा बड़ी कठिन है। अमुक काम हिंसा है या अहिंसा- यह सवाल मेरे मन में कई बार उठा है। मैं समझता हूँ कि मन, वचन और शरीर से किसी को भी दुःख न पहुंचाना अहिंसा है। लेकिन इस पर अमल करना, देहधारी के लिए असंभव है।
10- हम जो दुनिया के जंगलों के साथ कर रहे हैं वो कुछ और नहीं बस उस चीज का प्रतिबिम्ब है जो हम अपने साथ और एक दूसरे के साथ कर रहे हैं।
11- हिंसक गुंडागिरी से न तो हिंदू धर्म की रक्षा होगी, न सिख धर्म की। गुरु ग्रंथ साहब में ऐसी शिक्षा नहीं दी गई है। ईसाई धर्म भी यह बात नहीं सिखाता। इस्लाम की रक्षा तलवार से नहीं हुई है। आपको अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करनी होगी। वह रक्षा आप तभी कर सकते हैं जब आप दयावान एवं वीर बनें और सदा जागरूक रहें, अन्यथा एक दिन ऐसा आएगा जब आपको इस मूर्खता का पछतावा होगा, जिसके कारण यह सुंदर और बहुमूल्य फल आपके हाथ से निकल जाएगा। मैं आशा करता हूं कि वैसा दिन कभी नहीं आएगा। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि लोकमत की शक्ति तलवारों से अधिक होती है।
12- कुछ ऐसा जीवन जियो जैसे की तुम कल मरने वाले हो, कुछ ऐसा सीखो जिससे कि तुम हमेशा अमर रहने वाले हो।
13- मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है, सत्य मेरा भगवान है और अहिंसा उसे पाने का साधन।
14- दुनिया में ऐसे लोग हैं, जो इतने भूखे हैं कि भगवान उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता, सिवाय रोटी के रूप में।
15- एक कृत्य द्वारा किसी एक दिल को ख़ुशी देना, प्रार्थना में झुके हज़ार सिरों से बेहतर है।
16- आपको इंसानियत पर कभी भी भरोसा नहीं तोडना चाहिए क्योंकि इस दुनिया में इंसानियत एक ऐसा समुद्र है जहाँ अगर कुछ बूँदें गंदी हो भी जाएँ तो भी समुद्र गंदा नहीं होता।
17- पहले वह आपकी उपेक्षा करेंगे, उसके बाद आपपे हसंगे, उसके बाद आपसे लड़ाई करेंगे, उसके बाद आप जीत जायेंगे।
18- मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।
19- विश्वास करना एक गुण है, जबकि अविश्वास दुर्बलता को जन्म देता है।
20- आंख के बदले आंख पूरे विश्व को अंधा बना देगी।

4 comments:

prabhat kumar roy said...

Mahatama Gandhi was the last saint of Bhakti Andolan, who introduced political fervor in movement. Since Kabir to Gandhi each of them renders humanistic outlook to Hindus and Muslims.But vary unfortunate till now. India is heading towards fanticism. So called Hidutavadies have captured political power. Islamic faniticism is also on rise. We need Gandhi vary much these days.

Nirmal Gupta said...

आज गांधी जी की सबसे अधिक जरूरत है।उन जैसा व्यक्तित्व सदियों में पैदा होता है।

Satish Saxena said...

अब हम सब चालाक हैं और उद्देश्य पूर्ती धन कमाने के लिए किसी भी पूर्वज को गरिया सकते हैं बशर्ते वोट मिलें ! नमन बापू को

Vandana Agarwal said...

Bahut achcha

तकनीकी सहयोग- शैलेश भारतवासी

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