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Thursday, September 23, 2010

तुम्हारे बिना अयोध्या

राम !
तुम्हारी अयोध्या मैं कभी नहीं गया
वहाँ जाकर करता भी क्या
तुमने तो ले ली
सरयू में जल समाधि.

अयोध्या तुम्हारे श्वासों में थी
बसी हुई थी तुम्हारे रग-रग में
लहू बन कर .
तुम्हारी अयोध्या जमीन का
कोई टुकड़ा भर नहीं थी
न ईंट गारे की बनी
इमारत थी वह.
अयोध्या तो तुम्हारी काया थी
अंतर्मन में धड़कता दिल हो जैसे .

तुम भी तो ऊब गए थे
इस धरती के प्रवास से
बिना सीता के जीवन
हो गया था तुम्हारा निस्सार
तुम चले गए
सरयू से गुजरते हुए
जीवन के उस पार.
तुम गए
अयोध्या भी चली गई
तुम्हारे साथ .

अब अयोध्या में है क्या
तुम्हारे नाम पर बजते
कुछ घंटे घडियाल.
राम नाम का खौफनाक उच्चारण
मंदिरों के शिखर में फहराती
कुछ रक्त रंजित ध्वजाएं.
खून मांगती लपलपाती जीभें
आग उगलती खूंखार आवाजें.
हर गली में मौत की पदचाप
भावी आशंका को भांप
रोते हुए आवारा कुत्ते .

तुम्हारे बिना अयोध्या
तुम्हारी अयोध्या नहीं है
वह तो तुम्हारी हमनाम
एक खतरनाक जगह है
जहाँ से रुक -रुक कर
सुनाई देते हैं
सामूहिक रुदन के
डरावने स्वर.

राम !
मुझे माफ करना
तुम्हारे से अलग कोई अयोध्या
कहीं है इस धरती पर तो
मुझे उसका पता मालूम नहीं .

Tuesday, February 10, 2009

प्‍यार के तालिबानी

आजकल सबसे ज्‍यादा तालिबानियों की चर्चा है। कोई भी अखबार या न्‍यूज चैनल तालिबानियों की चर्चा या खबर/अ-खबर के बगैर पूरा ही नहीं होता। खबर हो या न हो लेकिन तालिबानी जरूर होते हैं। वैसे तालिबानी होना अब एक मुहाबरा बन गया है। अब हर जगह तालिबानी याद आते हैं। बैंगलौर के पव में युवक-युवतियों की धुनाई हुई तो तालिबानी याद आए। वेलेंटाइन डे या वीक हो तो भी तालिबानी। जी हां! प्‍यार के तालिबानी। ...चलिए हम भी आज प्‍यार के तालिबानियों की चर्चा करते हैं।
वेलेंटाइन डे से पहले प्रेमी युगलों में जबरदस्‍त उत्‍साह है, वहीं प्‍यार के तालिबानियों ने मेरठ में कमर कस ली है। इस बार प्‍यार के इन तालिबानियों ने एक अनोखा फरमान सुनाया है। इस फरमान के मुताबिक प्रेम पर पहरा देने वाले लोग वेलेंटाइन डे पर अपने साथ हवनकुंड लेकर चलेंगे और इन्‍हें जहां भी अविवाहित प्रेमी युगल वेलेंटाइन डे सेलीब्रेट करते मिलेंगे, वहीं उन्‍हें पकड़कर सात फेरे करवा दिए जाएंगे। इसी तरह कुछ मंडलियां प्रेमी युगलों को मुर्गा बनाने और पिटाई करने का ऐलान कर रही हैं लेकिन इस सब के बावजूद प्रेमी युगल वेलेंटाइन वीक मनाते हुए अपनी लीलाओं में मस्‍त हैं।
मेरठ के गांधी बाग में करीब चार साल पहले उत्‍तर प्रदेश पुलिस के वीर जवानों ने ऑपरेशन मजनू चलाकर प्रेमी युगलों में थप्‍पड़ बजाए थे। युवक-युवतियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। पुलिस की महिला नेत्रियां प्रेमी युगलों को पकड़ने के लिए ऐसे भागी थीं जैसे ओलंपिक की रेस में दौड़ लगा रहीं हों लेकिन आज यहां का नजारा बिल्‍कुल अलग है। एक बार फिर ये गांधी बाग फिर प्रेमी युगलों से आबाद है। जिसने भी ऑपरेशन मजनु की तस्‍वीरें देखी होंगी वह यह सोच भी नहीं सकता था कि मेरठ के गांधी बाग को प्रेमी युगल फिर से हरा-भरा कर देंगे। एक-दो नहीं बल्कि सुबह से शाम तक दर्जनों जोड़े आजकल इस पार्क में आ जा रहे हैं। यही हाल शहर के दूसरे ऐसे स्‍थलों और मॉल्‍स का है, जहां वेलेंटाइन वीक के रोज डे से लेकर किस डे तक परमानंद अवस्‍था में सेलीब्रेट हो रहे हैं लेकिन प्‍यार के तालिबानियों के फरमान से ये लोग थोड़ा विचलित हैं और ऐसे फरमानों को अधिकारों पर हमला मान रहे हैं।
एक तरफ प्रेमी युगल प्रेम के इजहार से लेकर प्रेम लीलाओं में मस्‍त हैं वहीं प्‍यार के तालिबानी कहे जाने वाले संगठनों ने इसे विदेशी अपसंस्‍कृति कहकर जनजागरण शुरु कर दिया है। बजरंग दल ने शहर भर में होर्डिंग्‍स लगवाएं हैं जिसमें वेलेंटाइन वीक में पड़ने वाले दिवसों की अनुवाद कर बताया है कि इनके मायने क्‍या हैं। शहर भर में पर्चे भी बांटे जा रहे हैं और चेतावनी भी कि यदि कोई प्रेमी युगल सार्वजनिक स्‍थलों पर घूमता पाया गया तो उनकी मंडलियां वहीं पकड़कर उनके घरवालों को बुलवाएगीं और शादी कर कन्‍यादान भी बजरंग दल के लोग करेंगे। बजरंग दल की टोलियां वेलेंटाइन डे पर अपने साथ हवनकुंड लेकर निकलेंगी और साथ-साथ घूम रहे अविवाहित युवक-युवतियों को पकड़कर सात फेरे करा देंगी। बजरंग दल जहां प्रेमी युगलों का घर बसाने का फरमान लेकर मैदान में है तो शिव सेना उन ग्रीटिंग्‍स और अन्‍य सामग्री की होली जलाने का ऐलान कर चुका है जिसमें युवक-युवतियों की चुंबन लेते या बांहों में बांहें डाले तस्‍वीरें होंगी। साथ ही शिव सेना शादी नहीं कराएगी बल्कि अपने परंपरागत तरीके से इन युगलों को मुर्गा बनाकर धुनाई भी करेगी।
बजरंग दल ने शहर भर में जनजागरण के लिए जो पर्चे बटबाए हैं उसमें फ्रेगन्‍स डे को खुशबू देने का दिन, टेडी डे को खिलौने देने का दिन, प्रपोज्‍ड डे को दोस्‍ती करने का दिन, रोज डे को गुलाब देने का दिन, डेट डे को झूठ बोलकर यार के साथ जाने का दिन, चाकलेट डे को एक-दूसरे को झूठी चॉकलेट खिलाने का दिन, स्‍लेब डे को अश्‍लीलता के साथ एक-दूसरे को चांटे मारने का दिन, हग डे को बांहो में बांहें डालने का दिन, किस डे यानी चुंबन का दिन, वेलेंटाइन डे यानी बचा खुचा काम करने का दिन और फोरगिवनेस डे यानी मजे लेकर छुटकारा पाने का दिन बताया गया है। बजरंग दल का कहना है कि हम किसी युगल को छुटकारा नहीं लेने देंगे और उनकी पकड़े जाने पर शादी कराई जाएगी।
हमारे कई मित्र बजरंग दल के इस कदम को विरोध का सकारात्‍मक तरीका मानते हैं। आपकी क्‍या राय है; खुलकर इजहार कीजिएगा क्‍योंकि मेरठ तो एक प्रतीक है लेकिन मुद्दा समूचे समाज और राष्‍ट्र से जुड़ा है।

Saturday, August 16, 2008

भोले के नाम एक पाती

शिव जी के बारे में कहा जाता है जितने गरम उतने ही नरम। सीधे इतने कि नाम के साथ ही भोले जुड़ा है। कल्याण के देवता हैं, दूसरों के हिस्से का हलाहल पीकर भी मस्त रहते हैं। दुनिया के मालिक हैं, लेकिन कुछ लोगों ने उनका नाम कुछ एकड़ ज़मीन की लड़ाई में फंसा लिया है। मेरे जैसे भक्त उनके नाम पर चल रहे तांडव को पचा नहीं पा रहे हैं। उनके कलयुगी गण तो मेरी क्या सुनेंगे, सोचता हूं सीधे भोले से ही बात कर लूं।

भगवन नीचे झांककर तो देखिये

भगवान भोले शंकर कैलाशपति
सादर चरण स्पर्श

आशा है आप कैलाश पर्वत पर या जहां भी कहीं इस वक्त होंगे मां पार्वती, श्री गणेश जी और कार्तिकेय जी के साथ आनंद से होंगे और हम जैसे भक्तों के लिये आनंदमय भविष्य का ग्राफ बना रहे होंगे। लेकिन भगवन मैं आनंद से नहीं हूं। इस बार सावन का मेह ज्येष्ठ-आषाढ से ही बरस रहा है लेकिन मेरा मन रो रहा है। मैंने क्या मेरे जैसे आपके किसी अन्य घनघोर भक्त ने भी आपका तांडव ना कभी देखा है, ना देखना चाहते हैं और ना ही कभी उसके बारे में सोचा है। कल तक तो हम घर के ड्राइंग रुम में रखी नटराज की मूर्ति की भावभंगिमा से ही तांडव का अंदाज़ लगा पाते थे, जिसमें आपके तांडव की महज़ एक अदा नज़र आती है। लेकिन पहले जम्मू और बाद में यानी दो-तीन दिन पहले देश के कई शहरों की सड़कों पर जो कुछ देखा उससे सहज़ अंदाज़ हो गया कि असली तांडव कैसा होता होगा।
भगवान ज़रा नीचे झांककर तो देखिये ज़रा सी ज़मीन के लिये आपके नाम पर आपके कलयुगी गण क्या तांडव मचा रहे हैं। आपने जिन लोगों के लिये दुनिया जहान का ज़हर पी लिया वो आपके नाम पर किस तरह से ज़हर फैला रहे हैं। आप तो कल्याण के देवता हैं लेकिन आपके कलयुगी गण तो उस दिन मरीज़ों को अस्पताल तक जाने से रोक रहे थे। भगवन, उस दिन अंबाला और कानपुर में दो लोग इसलिये यमराज के पास चले गये कि उनको समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने दिया गया। आप तो जीवन देते हैं और आपके कलयुगी गण आपके नाम पर मौत।
भगवान आप तो समंदर से लेकर हिमालय तक सबके मालिक हैं। सौ-पचास एकड़ ज़मीन में तो आपके नादिया के चरने लायक घास भी नहीं उग पायेगी। इतनी सी जगह तो श्री गणेश जी के चूहे के बिल के लिये भी पूरी नहीं होगी। लेकिन ज़रा नीचे झांककर देखिये आपके कलयुगी गण तो उसके लिये कोहराम मचाये हुए हैं। आप वहां नंगे बदन इतनी सर्दी, गरमी, बारिश में हमारे लिये तप करते हैं और आपके कलयुगी गण आपके मंदिर तक की यात्रा को पिकनिक की तरह मौजमस्ती वाली बनाना चाहते हैं। अमरनाथ से भी आजकल जल्द ही रवाना हो जाते हैं, मुझे पता है धर्म और आस्था के नाम पर धंधे की गरमी आपसे बर्दाश्त नहीं होती। आप नाराज़ हैं क्योंकि आपके मंदिर के पास भट्टियां जलाकर छोले भटूरे तले जा रहे हैं, डोसा और चीले बन रहे हैं, पकौड़ियां छानी जा रही हैं, पित्ज़ा बन रहे हैं और दूध फेंटा जा रहा है। और अब खा-पीकर रास्ते में आराम करने के लिये भी तो जगह चाहिये। उस जगह पर बनेगा क्या, ठंडे-गरम पानी के हमाम, शौचालय? यानी दर्शन से पहले और बाद में आराम के लिये आपके नाम पर सब कुछ होगा।
भगवन, ज़रा सी ज़मीन के लिये कोहराम मचाने वाले और उस ज़मीन पर आरामतलबी करने वाले भक्त भी आपके दर पर आयेंगे तो आप उनको भगा तो नहीं देंगे लेकिन कुछ ऐसा चक्कर तो चला सकते हैं कि वो इंसानियत सीख कर लौटें। किसी को जन्म देना तो उनके बस में नहीं होगा लेकिन मौत के हरकारे तो ना बनें।
भगवन, ध्यान रखना। देश का एक हिस्सा जल रहा है। अब कान्हा की तरह लीला करना छोड़िये और अपने कलयुगी गणों की मति फेरिये। बरसों बाद अमन का मौका आया है देश में, उसे बना रहने दीजिये। अगले सोमवार को जब आपके दर्शन करने आउंगा तब आपसे पूछूंगा इस बारे में। इतने सारे लोगों के सामने आप बोलेंगे नहीं मुझे पता है लेकिन मैं तो आपके मन की और मौन की भाषा भी जानता हूं। कलयुग में पैदा हुआ हूं लेकिन कलयुगी नहीं हूं।

तकनीकी सहयोग- शैलेश भारतवासी

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